Tuesday, August 4, 2015

 

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग में 1,473 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं को खुलासा किया है. अपनी रिपोर्ट में अनियमितताओं को रेखांकित करते हुए कैग ने प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं.
कैग ने ये सभी बातें मार्च 2014 को समाप्त वित्त वर्ष में राज्य के सामान्य, सामाजिक व आर्थिक (गैर सार्वजनिक) क्षेत्रों पर अपनी रिपोर्ट में लिखी है.प्रदेश के महालेखाकार (ऑडिट) विजय कुमार मोहंती के मुताबिक 'जल संसाधन विभाग की ऑडिट में कैग को 1,473 करोड रुपए की वित्तीय अनियमितताएं मिली हैं.
कैग के मुताबिक, छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग को अपने निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने में नब्बे से भी अधिक साल का समय लगेगा. रिपोर्ट के मुताबिक, जिस रफ्तार से विभाग का काम चल रहा है. इससे उसे अपने निर्धारित लक्ष्य जोकि 27 हजार हेक्टेयर प्रति वर्ष है उसको पूरा करने में कम से विभाग को 91 साल का वक्त लगेगा.
उन्होंने कहा कि राज्य के जल संसाधन विभाग ने छत्तीसगढ़ के गठन के 14 साल बाद भी सिंचाई को ले कर मास्टर प्लान तैयार नहीं किया है. यहां तक कि उचित सिंचाई परियोजनाओं को चिन्हित करने के लिए एकीकृत जल संसाधन मास्टर प्लान का मसौदा तक तैयार नहीं किया गया है.
प्रदेश में सिंचाई की सही व्यवस्था नहीं होने का सीधा प्रभाव प्रदेश की खेती पर पड़ रहा है. रिपोर्ट के अनुसार राज्य का जल संसाधन विभाग सिंचाई सुविधाओं के सृजन आदि के लक्ष्य में साल दर साल चूकता रहा है. यही कारण है कि साल 2009-2014 के दौरान विभाग सिंचाई क्षमता सृजन के लिए तय लक्ष्यों का केवल 23 प्रतिशत से 68 प्रतिशत ही हासिल कर सका है.
News18

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